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जरूरी नहीं कि मदद करनेवाला आपका दोस्त ही हो
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Monday, 26 December 2016 04:14 PM Posted By - kanhaiya jee

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  • गरमी से परेशान एक पक्षी ने ठंडे स्थान पर जाने के लिए दक्षिण की ओर उड़ान भरी. वहां काफी ठंड थी. ठंड इतनी जबरदस्त थी कि वह पक्षी नीचे गिर पड़ा और बिल्कुल बर्फ की तरफ जम गया. वह जमीन पर बेहोश पड़ा थी कि एक गाय ने उसके ऊपर गोबर कर दिया. शरीर के ऊपर गोबर पड़ने से पक्षी को गरमाहट का एहसास हुआ. उसे होश आ गया. वह बहुत खुश था और खुशी में उसने चहकना शुरू कर दिया. पास से एक बिल्ली गुजर रही थी. उसके कानों में भी उस पक्षी की चहचाहट सुनायी दी. उसने इधर-उधर ढूंढ़ना शुरू किया. उसने देखा कि एक पक्षी गाय के गोबर में फंसा है. बिल्ली को देख कर पक्षी को लगा कि वह उसे बचाने आयी है, लेकिन उस बिल्ली ने पहले तो उसे वहां से निकाला और और फिर अपना भोजन बना लिया. इस कहानी से हमें प्रबंधन की तीन महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं, जिनका हमें हमेशा ध्यान रखना चाहिए. 1. अगर आप किसी के कारण मुसीबत में पड़ गये हों, तो यह जरूरी नहीं कि वह आपका दुश्मन ही हो. 2. आपको मुसीबत से निकालनेवाला आपका दोस्त ही हो, यह हमेशा जरूरी नहीं होता. 3. जब आप किसी बड़ी मुसीबत में हों, तो बेहतर है कि चुपचाप अपना मुहं बंद रखें और बेहतर समय का इंतजार करें. हम भारतीय दिल से बेहद भावुक होते हैं. किसी के द्वारा की गयी थोड़ी-सी मदद से प्रभावित होकर हम उसे पूरी जिंदगी के लिए ही दोस्त मान लेते हैं. इसके विपरीत अगर किसी की लापरवाही या नासमझी के कारण हम परेशानी में पड़ जायें, तो हमारे लिए वह व्यक्ति दुश्मन बन जाता है. दोनों ही स्थितियों में हम बाकी स्थितियों पर विचार नहीं करते. एक सफल प्रोफेशनल बनना है, तो हमें हमेशा इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि कौन हमारे दोस्त हैं और कौन दुश्मन. कब-कौन दगा दे दे या कब कोई आपके लिए अवसर का दरवाजा खोल दे, आप इसका अनुमान नहीं लगा सकते. इसलिए हमेशा अलर्ट रहें. बात पते कीः -किसी के द्वारा की गयी थोड़ी-सी मदद से प्रभावित होकर हम उसे पूरी जिंदगी के लिए ही दोस्त मान लेते हैं. -कब-कौन दगा दे दे या कब कोई आपके लिए अवसर का दरवाजा खोल दे, इसका अनुमान नहीं लगा सकते. इसलिए अलर्ट रहें.

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